खुद से इतना प्यार कर लीजिए कि आपको “आप” से प्यार हो जाए
आज हम अपनी प्रेमिका से किसी चीज़ को लेकर बात कर रहे थे…. बात शायद किसी और के बारे में शुरू हुआ था, लेकिन बात करते-करते पता नहीं कहाँ से हम खुद पर आ गए हम उनसे discuss कर रहे थे कि किसी इंसान को सिर्फ उसके नाम, उसके family, उसके caste, उसके education, उसके profession या उसके किसी एक tag से नहीं देखना चाहिए मान लीजिए किसी लड़की का नाम Shreya है अब Shreya को कोई सिर्फ Shreya समझता है कोई उसको उसकी family के नाम से देखता है कोई उसको उसकी caste से पहचानता है कोई बोलता है कि ये missionary school की लड़की है कोई बोलता है कि इसका English बहुत अच्छा है कोई उसको उसके कपड़ा, उसके बाल, उसके looks या उसके काम से judge करता है और धीरे-धीरे Shreya खुद भी अपने बारे में यही सब चीज़ मानने लगता है कि…. “हम Shreya हैं” लेकिन क्या सच में? अगर Shreya नाम, family, caste, looks aur baaki tags, हटा दीजिए तो? तो फिर Shreya में क्या बचेगा? शायद वही असली Shreya है और हमको लगता है कि किसी इंसान से प्यार करने के लिए सबसे पहले उस इंसान के उस हिस्से तक पहुँचना जरूरी है उसके tags के आर-पार हमलोग चाहते हैं कि सामने वाल...