खुद से इतना प्यार कर लीजिए कि आपको “आप” से प्यार हो जाए

आज हम अपनी प्रेमिका से किसी चीज़ को लेकर बात कर रहे थे….


बात शायद किसी और के बारे में शुरू हुआ था, लेकिन बात करते-करते पता नहीं कहाँ से हम खुद पर आ गए


हम उनसे discuss कर रहे थे कि किसी इंसान को सिर्फ उसके नाम, उसके family, उसके caste, उसके education, उसके profession या उसके किसी एक tag से नहीं देखना चाहिए


मान लीजिए किसी लड़की का नाम Shreya है

अब Shreya को कोई सिर्फ Shreya समझता है

कोई उसको उसकी family के नाम से देखता है

कोई उसको उसकी caste से पहचानता है

कोई बोलता है कि ये missionary school की लड़की है

कोई बोलता है कि इसका English बहुत अच्छा है

कोई उसको उसके कपड़ा, उसके बाल, उसके looks या उसके काम से judge करता है


और धीरे-धीरे Shreya खुद भी अपने बारे में यही सब चीज़ मानने लगता है


कि….


“हम Shreya हैं”


लेकिन क्या सच में?


अगर Shreya नाम, family, caste, looks aur baaki tags, हटा दीजिए तो?


तो फिर Shreya में क्या बचेगा?


शायद वही असली Shreya है


और हमको लगता है कि किसी इंसान से प्यार करने के लिए सबसे पहले उस इंसान के उस हिस्से तक पहुँचना जरूरी है


उसके tags के आर-पार


हमलोग चाहते हैं कि सामने वाला हमको समझे, कि कोई हमारे बारे में गलत ना बोले, कि कोई हमारे family, हमारे looks, हमारे काम, हमारे past या हमारे किसी decision को लेकर हमको छोटा ना समझे


लेकिन हमलोग खुद अपने बारे में कितना जानते हैं?

हमलोग खुद को भी तो tags में ही देखते हैं


हम artist हैं


तो हमारा पूरा personality artist हो गया

हम कुछ अच्छा बना दिए तो हमको लगता है हम बहुत अच्छे हैं

कुछ खराब बना दिया तो लगता है शायद हम उतना ख़ास artist भी नहीं हैं

किसी ने हमारे काम की तारीफ कर दी तो हम खुश

किसी ने ignore कर दिया तो मन खराब

यानी हमने अपने आप को भी दूसरे लोगों के reaction से बाँध दिया



हमलोग अपना ऊपर बहुत tag लगा रखे हैं

कुछ tags हमलोग खुद लगाए हैं

कुछ दुनिया लगा दिए

कुछ family

कुछ society लगाया 

कुछ लोग, जो हमको बहुत कम जानते थे

और कुछ tags ऐसा है जो समय के साथ खुद लगते चल गया


लेकिन हमको लगता है कि इन सबके आर-पार देखना जरूरी है

क्योंकि आपका tag आप हैं ही नहीं

आपका नाम आप नहीं हैं

आपका caste, पैसा, past, ये सब कुछ भी आप नहीं हैं

आपका आप नहीं हैं

और…. आपका failure भी आप नहीं हैं


शायद इसी वजह से हम बोल रहे थे कि  “खुद से इतना प्यार कर लीजिए कि आपको ‘आप’ से प्यार हो जाए”


ना कि Shreya नाम की लड़की से जिसका फलाना कास्ट है, फलाने family की है, फलाना फलाना 


ये सब चीज़ से ऊपर


क्योंकि ये सब Shreya के बारे में जानकारी है

Shreya खुद नहीं

और ये बात सिर्फ Shreya के लिए नहीं है

हम सबके लिए है


हमलोग अपने बारे में जितना जानते हैं, उसका बहुत बड़ा हिस्सा actually हमारे बारे में नहीं है

वो सिर्फ हमारे ऊपर चिपका हुआ information है


और एक अजीब चीज़ है


किसी दूसरे के tags के आर-पार देखना शायद फिर भी आसान है

अपने tags के आर-पार देखना बहुत मुश्किल है

हमलोग खुद अपने ऊपर इतना कुछ चढ़ा लिए हैं कि अब खुद को बिना उसके देखना मुश्किल हो गया है


हम भी यही कर रहे हैं

हम सारा tags के आर-पार देख चुके हैं खुद में

सिवाय एक tag के… Artist


ये tag हमारे लिए इतना heavy हो गया है कि इसके बारे में हमेशा बात करते हैं

साला ऐसा लगता है कि हम जो भी हैं, उस सबको “artist” के अंदर ही डाल दिए हैं


लेकिन main दिक्कत ही यही है


क्योंकि समय के साथ मेरे भीतर का artist इतना grow कर गया है कि अब उसके पार देखना भी tough job हो गया है

पहले कभी-कभी हम अपने काम को बाहर से देख पाते थे

अब नहीं

अब हम जो बनाते हैं, उसके अंदर इतना कुछ लगा देते हैं कि खुद ही उससे detach होना मुश्किल हो जाता है

और शायद यही कारण है कि हम अपने काम से हमेशा थोड़ा असंतुष्ट रहते हैं


लोग बोलेंगे…

“भाई, बहुत अच्छा है”

और हम सोचेंगे…

“नहीं, अभी ये वो नहीं है जो हम देख रहे थे”


क्यों?


क्योंकि सामने वाले को सिर्फ output दिख रहा है

हमको उसके पीछे का वो पूरा संसार दिख रहा है जो हमारे दिमाग में था


और दोनों के बीच का gap सिर्फ हम जानते हैं


लेकिन शायद एक दिन ऐसा आएगा जब मेरा work life balance थोड़ा सही होगा

दिमाग हर समय survival mode में नहीं रहेगा

मेरा artist थोड़ा शांत रहेगा

हर चीज़ को prove करने का बेचैनी थोड़ा कम रहेगा

तब शायद हम अपने artist के भी आर-पार देख पाएँगे और उसके पीछे जो आदमी है, उससे मिल पाएँगे

शायद वो आदमी artist से भी पहले से वहाँ था

बस हम उसको टैग सब के नीचे दबा रखे हैं कि दिखाई नहीं दे रहा


हमको लगता है इंसान को खुद से प्यार करने के लिए पहले खुद को समझना जरूरी नहीं है

क्योंकि अगर खुद को पूरी तरह समझना जरूरी होता,

तो शायद कोई भी खुद से प्यार नहीं कर पाता

हम खुद को आज जितना समझते हैं,

कल उससे अलग निकल सकते हैं

आज जिस चीज़ पर पूरा proud है,

कल वही childish लग सकता है

आज जिस इंसान से नफरत है,

कल समझ आ सकता है कि वो भी उस समय अपनी समझ के हिसाब से जी रहा था

आज हमको लगता है हम ऐसे हैं

कल पता चलेगा, “हम वैसे थे।”

इंसान कोई finished product थोड़िये है

इसलिए खुद से प्यार करने का मतलब ये नहीं है कि हर दिन आईना देखकर बोलिए “हम बहुत अच्छे हैं”

खुद से प्यार करने का मतलब इतना है कि आप अपने सबसे खराब दिन में भी खुद को छोड़िए मत

जब आप असफल हों तब भी

जब आप confused हों तब भी

जब आपके पास कोई achievement ना हो तब भी

जब कोई आपकी तारीफ ना करे तब भी

जब आपका कोई tag आपके काम ना आए तब भी

तब भी आप अपने साथ बैठ पाएँ

बिना कुछ prove किए

बिना कुछ achieve किए

बिना कोई पहचान के


बस, आप, खुद

क्योंकि अंत में शायद हम सब यही चाहते हैं

कोई हमलोग को हमारे tags के साथ नहीं,

उनके बावजूद प्यार करे


लेकिन उससे पहले एक काम और जरूरी है

हमलोग को अपना सब  tags के आर-पार जाकर खुद को देखना पड़ेगा

फिर maybe एक दिन हमको समझ आएगा…


जिस इंसान को हम पूरी जिंदगी बाहर ढूँढ रहे थे,

जिससे कोई बिना condition के प्यार करे,

जिसको कोई पूरी तरह समझे,

जिसको कोई उसके हर version में accept करे

वो इंसान शायद हमेशा से हमारे साथ था

बस हम उससे मिलने में बहुत busy थे

दुनिया को अपना नाम बताते-बताते,

अपना काम बताते-बताते,

अपना पहचान बताते-बताते,

अपना कहानी बताते-बताते,

हम ये भूल गए कि इन सबके नीचे भी कोई है

और उसका का कोई नाम नहीं है

कोई tag नहीं है

बस एक इंसान है


और… बस उसी इंसान से प्यार करना है

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